योजना


1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम


महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 2005 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम की तलाश करने वाले लोगों को 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है। यह अधिनियम गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करता है। मनरेगा के तहत मजदूरी आधारित कार्य जैसे सड़क निर्माण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, तालाब खुदाई और अन्य सार्वजनिक संपत्ति निर्माण कार्य किए जाते हैं। यह अधिनियम श्रमिकों को समय पर मजदूरी भुगतान और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन जॉब कार्ड और भुगतान प्रणाली प्रदान करता है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY)

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 2014 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य गरीब ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें रोजगार के योग्य बनाना है। DDU-GKY, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का एक हिस्सा है और इसका लक्ष्य 18 से 35 वर्ष की उम्र के गरीब युवाओं को प्रशिक्षण देना और उन्हें संगठित क्षेत्रों में रोजगार दिलाना है। इस योजना के तहत सरकार निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सहायता, और कैरियर मार्गदर्शन प्रदान करती है। प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार डिज़ाइन किया जाता है, ताकि युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।

2. प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G)

प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (PMAY-G) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 2016 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और बेघर परिवारों को पक्के मकान प्रदान करना है। इस योजना के तहत सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता देती है, जिससे वे अपना खुद का घर बना सकें। योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 1.20 लाख रुपये (सामान्य क्षेत्र) और 1.30 लाख रुपये (पहाड़ी और कठिन क्षेत्रों) की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, इस योजना में शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन और रोजगार के अवसर देने के लिए मनरेगा से भी जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) भारत सरकार द्वारा 2000 में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करना है, ताकि गाँवों को शहरों और बाजारों से जोड़ा जा सके। इस योजना के तहत 500 से अधिक आबादी वाले गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है (पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए यह सीमा 250 की आबादी है)। PMGSY का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, किसानों को बाजार तक पहुंच देना, और सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। यह योजना केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के संयुक्त वित्तीय सहयोग से चलाई जाती है।

सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY)

सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) की शुरुआत 11 अक्टूबर 2014 को भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गांवों का समग्र विकास करना और उन्हें आदर्श ग्राम (Model Village) के रूप में विकसित करना है। इसके तहत, हर सांसद (सांसद - Member of Parliament) को 2024 तक कम से कम 3 गांवों को गोद लेकर उनका विकास करना होगा। इस योजना के तहत सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र में एक गाँव को गोद लेकर उसे बुनियादी सुविधाओं से युक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध गाँव बनाना होता है। यह योजना ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और गाँवों को शहरों के बराबर अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) भारत सरकार द्वारा 1995 में शुरू किया गया एक सामाजिक कल्याण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, विशेष रूप से वृद्ध, विधवा, और विकलांग व्यक्तियों के लिए। यह कार्यक्रम संविधान के अनुच्छेद 41 के तहत कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मजबूत करता है। NSAP के अंतर्गत तीन मुख्य योजनाएँ शामिल हैं: 1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) – 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के BPL नागरिकों को पेंशन सहायता। 2. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS) – 40-79 वर्ष की विधवाओं को पेंशन सहायता। 3. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (IGNDPS) – 18-79 वर्ष के विकलांग नागरिकों को पेंशन सहायता। इसके अलावा, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS) और अन्नपूर्णा योजना के तहत गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता और मुफ्त खाद्यान्न भी प्रदान किया जाता है।

आजीविका - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)

आजीविका - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) भारत सरकार द्वारा 2011 में शुरू किया गया एक प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम है। इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है और इसका उद्देश्य गरीब ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए सतत आजीविका के अवसर पैदा करना है। इस योजना के तहत, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का गठन किया जाता है, जिन्हें आर्थिक सहायता, कौशल विकास, ऋण सुविधा और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जाती है। NRLM, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देता है और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमशीलता और स्वरोजगार को बढ़ावा देता है। 2015 में, NRLM का नाम बदलकर "दीन दयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)" कर दिया गया।

मिशन अंत्योदय

मिशन अंत्योदय भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य गांवों का समग्र और सतत विकास करना है। इस योजना की शुरुआत 2017 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका लक्ष्य गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी को कम किया जा सके। मिशन अंत्योदय के तहत, सरकार विभिन्न योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आदि को एकीकृत करके विकास कार्यों को तेज़ी से पूरा करती है। इसका मुख्य उद्देश्य 2022 तक 50,000 गांवों को गरीबी मुक्त बनाना था, लेकिन यह प्रयास अब भी जारी है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (SPMRM)

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (SPMRM) भारत सरकार द्वारा 21 फरवरी 2016 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य गांवों में शहरी सुविधाओं का विकास करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर बुनियादी ढांचा और आर्थिक विकास हो सके। इस मिशन के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों को "रूर्बन क्लस्टर" (Rurban Clusters) में विकसित किया जाता है, जिससे वे शहरी सुविधाओं से युक्त हो जाएं लेकिन ग्रामीण संस्कृति और पर्यावरण को बनाए रखें। इन क्लस्टर्स में सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्वच्छता, कौशल विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।